हरियाणा में हाल ही में कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट (CET) की पॉलिसी को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। यह पॉलिसी प्रदेश के ग्रुप-सी और ग्रुप-डी पदों के लिए हरियाणा सरकार द्वारा लागू की गई है। इस पॉलिसी के तहत अब तकनीकी और गैर-तकनीकी पदों के लिए एक ही परीक्षा आयोजित की जाती है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि तकनीकी पदों के लिए अलग से परीक्षा होनी चाहिए क्योंकि इन पदों के लिए विशेष तकनीकी ज्ञान और अनुभव की आवश्यकता होती है। उन्होंने इसे अधूरा और अनुचित बताया है कि तकनीकी पदों के उम्मीदवारों को सामान्य अभ्यर्थियों के साथ शामिल किया जा रहा है।
हरियाणा की यह CET पॉलिसी दिसंबर 2024 में अधिसूचित की गई थी, जिसमें विभिन्न तकनीकी वर्ग जैसे स्वास्थ्य, कृषि, इंजीनियरिंग, बिजली, मैकेनिकल, कंप्यूटर आदि के पदों के लिए भी सामान्य CET को अनिवार्य कर दिया गया। इसके खिलाफ कई अभ्यर्थियों ने आपत्ति जताई, लेकिन बिना उनकी शिकायतों पर ध्यान दिए हुए इस नीति को लागू कर दिया गया। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि तकनीकी ज्ञान और विशेषज्ञता वाले उम्मीदवारों की छंटनी इस सामान्य पॉलिसी के कारण हो रही है क्योंकि तकनीकी और गैर-तकनीकी दोनों पदों के लिए एक समान प्रश्न पूछे जा रहे हैं। यह उनके लिए असंगत और मनमानी है।
Haryana CET Latest Update
हरियाणा CET का पूरा नाम कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट है। यह एक परीक्षा है जिसका आयोजन राज्य सरकार के ग्रुप-सी और ग्रुप-डी वर्ग के पदों पर भर्ती के लिए किया जाता है। इस परीक्षा का उद्देश्य सभी अभ्यर्थियों को एक समान मंच देना है ताकि योग्य उम्मीदवारों का चयन किया जा सके। हालांकि इस बार लागू हुई पॉलिसी में तकनीकी पदों के लिए विशेष वर्ग का ध्यान नहीं रखा गया है, जिस कारण यह विवादित हो गई है।
सरकार ने CET पॉलिसी को सरल बनाने की कोशिश की है ताकि सभी पदों के लिए भर्ती में समान नियम लागू हो, लेकिन तकनीकी पदों पर इस पॉलिसी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। तकनीकी पद जैसे इंजीनियरिंग, मैकेनिकल, कंप्यूटर आदि के लिए खास तकनीकी प्रश्न और अनुभव जरूरी होते हैं, इसलिए याचिकाकर्ता चाहते हैं कि इनके लिए अलग से परीक्षा आयोजित की जाए।
पॉलिसी को चुनौती देने के कारण
हरियाणा सरकार की CET पॉलिसी में तकनीकी पदों के लिए अलग परीक्षा नहीं होने के कारण याचिकाकर्ताओं ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी है। उनका यह मानना है कि तकनीकी पदों की प्रकृति और आवश्यकता अन्य सामान्य पदों से भिन्न होती है, इसलिए तकनीकी उम्मीदवारों को विशेषज्ञता के अनुसार परखा जाना चाहिए।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि जून 2025 में आयोजित हुई CET में तकनीकी पदों के लिए भी वही सामान्य प्रश्न पूछे गए जो गैर-तकनीकी पदों के लिए होते हैं। इससे तकनीकी क्षेत्रों के विशेषज्ञ उम्मीदवारों को बहुत नुकसान हुआ क्योंकि उनके ज्ञान और अनुभव की पूरी क्षमता का आकलन नहीं हो पाया। यह स्थिति उनकी नौकरी पाने की संभावना को कम कर देती है।
उनका यह भी कहना है कि सरकार ने 31 दिसंबर 2024 की अधिसूचना में आपत्तियों को अनदेखा करते हुए पॉलिसी को लागू कर दिया, जो अनुचित है। ऐसे में वे पॉलिसी को रद्द कर तकनीकी पदों के लिए अलग से पात्रता परीक्षा कराने की मांग करते हैं ताकि भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष हो।
सरकार और कोर्ट की प्रतिक्रिया
हरियाणा सरकार ने अदालत में कहा है कि CET पॉलिसी के मुद्दे पर विस्तृत जवाब देने के लिए उन्हें समय चाहिए। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया है और अगली सुनवाई 21 अगस्त 2025 को निर्धारित की गई है। इस सुनवाई में हाईकोर्ट इस मामले में आगे की कार्रवाई करेगा।
सरकार की ओर से यह तर्क भी दिया गया है कि सामान्य CET से भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और भर्ती में समानता कायम रहेगी। हालांकि, तकनीकी पदों की विशिष्ट आवश्यकता के लिए भी उचित व्यवस्था की जाएगी, जैसा कि अदालत की अनुशंसा होगी।
आवेदन प्रक्रिया और जानकारी
हरियाणा CET के लिए आवेदन राज्य सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन किए जाते हैं। अभ्यर्थी अपनी योग्यता अनुसार उपयुक्त श्रेणी में आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के दौरान आवश्यक दस्तावेज़ जैसे शैक्षिक प्रमाण पत्र, अनुभव प्रमाण पत्र आदि जमा करने होते हैं। CET परीक्षा में सफल होने वाले उम्मीदवारों को संबंधित विभागों में भर्ती प्रक्रिया के लिए बुलाया जाता है।
तकनीकी पदों के लिए अलग परीक्षा की मांग को लेकर यदि कोर्ट कोई आदेश देता है तो भविष्य में आवेदन प्रक्रिया और परीक्षा का स्वरूप बदल सकता है। इस समय तक सभी उम्मीदवारों को जारी पॉलिसी के अनुसार ही तैयारी करनी है और आवेदन प्रक्रिया पूरी करनी है।
हरियाणा CET पॉलिसी से जुड़े विवाद की अगली सुनवाई 21 अगस्त 2025 को होगी, जिसके बाद इस बारे में और स्पष्टता आएगी कि तकनीकी पदों के लिए किस प्रकार की परीक्षा प्रणाली लागू होगी।
हरियाणा CET पॉलिसी पर यह विवाद इसलिए उठ रहा है ताकि तकनीकी पदों पर सही और विशेषज्ञ उम्मीदवारों को मौका मिल सके और भर्ती प्रक्रिया निष्पक्ष बनी रहे। उचित व्यवस्था बनाना सरकार और न्याय व्यवस्था दोनों के लिए आवश्यक है ताकि सभी इच्छुक उम्मीदवारों के अधिकार सुरक्षित रहें।
इस मामले में जो भी फैसला होगा वह प्रदेश में भर्ती प्रणाली को और बेहतर बनाने में मदद करेगा। उम्मीद है कि तकनीकी और गैर-तकनीकी पदों के लिए उपयुक्त परीक्षाएं और नियम बनाए जाएंगे, जिससे सभी योग्य उम्मीदवारों को समान अवसर मिल सके।
इस तरह से हरियाणा CET पॉलिसी को लेकर हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है, जो प्रदेश के विविध तकनीकी और गैर-तकनीकी पदों की भर्ती प्रणाली को सुधारने का प्रयास है। इससे तकनीकी क्षेत्र के युवाओं के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित होगी और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी।